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1900 रु प्रति बोरी हुई डी ए पी खाद , पूर्व IAS बोले- शेर पालना थोड़ा महंगा तो पड़ता है

मुन्नी देवी दीक्षित

किसान आंदोलन की वजह से दुनिया भर में मोदी सरकार की काफी किरकिरी हो चुकी है। किसान नेताओं का कहना है कि कृषि कानूनों के जरिए मोदी सरकार देश के किसानों को बर्बाद करने की साजिश रच रही है।

इन कृषि कानूनों के जरिए सिर्फ और सिर्फ देश के उद्योगपतियों को ही फायदा पहुंचेगा।

किसानों का कहना है कि अगर यह कृषि कानून लागू हुए तो उनका वजूद खत्म हो जाएगा। अपने अधिकारों को बचाने के लिए वह लंबे समय तक आंदोलन करेंगे।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भाजपा की बनाई गई किसान हितेषी योजनाओं की सच्चाई जाहिर करती एक खबर सामने आई है।

खबर के मुताबिक, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा 1 अप्रैल 2021 से डीएपी खाद के रेट बढ़ा दिए गए हैं।

देश के किसानों को अब यह खाद खरीदने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसकी खाद की कीमत के तहत अब पचास किलोग्राम की बोरी के लिए किसानों को 1900 रूपये देने होंगे।

इस मामले में मोदी सरकार किसान संगठनों के निशाने पर आ गई है। कहा जा रहा है कि सरकार इस तरह के फैसले सुना कर देश के किसानों की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ाने का काम कर रही है। जिससे किसान मरने को मजबूर हो जाए।

इस कड़ी में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने भी मोदी सरकार की किसानों को कथित फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई योजनाओं पर कटाक्ष किया है।

उन्होंने कहा है कि “DAP खाद की नयी क़ीमत : 1900 रु प्रति बोरी। जरूर किसान सम्मान निधि से मिलने वाली राशि का किसान दुरुपयोग कर रहे होंगे, इसलिए सरकार ने उसे सूद समेत वसूलने की सोची।

शेर पालना थोड़ा महँगा तो पड़ता ही है, किसान अपनी पत्नी का गहना गिरवी रख उर्वरक खरीदे।”

इस मामले में इफको के अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में डीएपी खाद में इस्तेमाल होने वाले फास्फोरिक एसिड और रॉक फास्फेट की कीमतें बढ़ गई हैं।

इस वजह से भारत में ऐसी परिस्थितियां बन गई है कि खाद का दाम बढ़ा दिया गया है। उनका कहना है कि यह दोनों ही केमिकल देश में उपलब्ध नहीं होते। इसे बाहर से मंगाया जाता है।

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